Malhotra Iron Works, Alwar

प्राचार्य की कलम से

    आर्यावर्त संस्कृति एवं सनातनत्व के आद्योपान्त ज्ञानार्जन हेतु संस्कृत महाविद्यालयों की पृथक से महनीय भूमिका रही है |
    वैदिक काल में वैदिक संस्कृत का अध्ययन अध्यापन होता था, जो कठिन था | वेय्याकरण युग में यास्क मुनि ने अपने निघंटु नमक विशाल ग्रन्थ में वैदिक संस्कृत पदों का अत्यंत सूक्ष्मता से निर्वचन करके पाणिनि युग के लिए पथ प्रदर्शन का कार्य किया | किन्तु भगवान  पाणिनि ने समस्त संस्कृत जगत को अष्टाध्यायी में संशिप्त कर आजके लोंकिक संस्कृत युग को जन्म दिया | अस्तु |
    आदिकवि बाल्मिकी से लेकर आज तक अनेक कवियों ने संस्कृत की अनेक विधाओं में रचना कर संस्कृत को विश्व में देदीप्यमान बना दिया, तो वैय्याकरणों नें अष्टाध्यायी को सुगम कर दिया तथा विभिन्न आचार्यों ने शास्त्र चिंतन संस्कृत को अपने आप में पूर्णता प्रदान की |
    अत: पूर्वकाल में संस्कृतनिष्ठ बहुत सा भू- भाग आर्यावर्त नाम से विश्व में शिरोमणि स्थान प्राप्त कर गया जिस आर्यावर्त का ही बड़ा भू- भाग भारत देश है, जिसकी धमनियों व शिराओ में संस्कृत की धरा अनंत रूप से प्रवाहित है |
    आज के वैज्ञानिक युग में भी संस्कृत का बहुमूल्य योगदान गई | अत: इसके अध्ययन अध्यापन हेतु विशेष शिक्षा के रूप में संस्कृत शिक्षा नाम से राजस्थान सरकार द्वारा अलग विभाग की स्थापना की हुई है

डा० विनीत कुमार गुप्‍ता
प्राचार्य
राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय अलवर
मो.न. 9460576302
ई-मेल :- sansalwar@gmail.com